जिसकी तलाश में मैं भटका वो मैं ही था
जानने वाला मौन प्रकाश
जहाँ उत्तर रुक जाते हैं
प्रेम जो पकड़ना नहीं जानता
देखने वाला कौन है?
जीवन का सही अर्थ
देखने की शुरुआत
जब प्रार्थना प्रश्न बन जाती है
अपने भीतर पूछे गए प्रश्न की आवाज